चप्पल एक मजेदार काहानी-hindi kahani 



हम सब को respect करते हे एक को छोड़ के बो हे चप्पल । चपल तो पेरो का निसानी हे चप्पल का भी बहत बडा कहानी हे । कोई कहता इसे sandal कोई कहता हे उसे footware हमे तो चप्पल कहके ही बुलनी हे । तो भाई अर बहनों मे चप्पल के बारे मे क्या क्या बोल राहा हूँ यह सोच रहे हो ना । चप्पल के बारे मे लिखूँगा तो चप्पल के बारे मे हीं बोलूँगा ना थोड़ी ना बिस्कुट के बारे मे बोलूँगा । ये चप्पल का कहानी एसी हे बिना पहने अगर बाहर निकले तो मुह से बही बाला गाना निकलेगा काटालगा पेरो मे आहा आहा ।


इतिहास

चपल का ब्यबहार बहत पुरातन काल से होता आ राहा हे । पुराणो मे बरनित हे तरेतया युग मे भगबन श्री राम जब बनबास गए थे 14 बरस केलिए उसी समय पे भरत जी ने श्री राम के उपनाह लेके 14 बरस तक राज्य संभाले थे । पुराने काल से पाद द्वय को सुरखित करने केलिए पादुका का उपयोग करते थे । बदलती दुनिया अर बदलती संस्कृति के हिसाब से ये बिभिन्न नाम अर बिभिन्न रूप से आया हे हमारे पद द्वय को सुरखित करने केलिए ।


कीमत

चप्पल का भी कीमत आसमान तक छु सकता हे राणा बाबु...  

एक दिन क्या हुआ एक गाँव के रहने वाला,एक छोटा सहर के रहेने वाला अर एक बहत बडा सहर मे रहने वाला तीन लोग एक साथ मिल गए । हम जेसे आज चप्पल के बारे मे discussion कर रहे हे वेसे बो लोग भी चप्पल के बारे मे बात करने लगे । पहले बडा सहर मे रहने वाला बोला भाया हमारे यहाँ चपल पहनता हूँ ब्रांडेड 5000 हजार रुपेया से कम का केसे दिखता हमको पता नहीं । छोटा सहर मे रहने वाला बोला भाई मे तो 10000 रूपेय का चपल मंगाया हे घर मे रख दिया 1 साल मे एक बार ही पहनता हूँ । तब गाँव मे रहने वाला बोला भाईओ मे तो 100 रूपीया का चप्पल खरीदने गया था मुझे 50 मे मिल गया ,50 का मे माल पी लिया ।

आज कल के जमाने मे कुछ एसा चपल मिलती हे जिसका कीमत से दो चार हेलिकापटोर,दो चार बोंगलो खरीद लूँ । कुछ चप्पल मे हीरा लगा होके भी आता हे । लोग भूखे मर रहे हे हीरा लगा के चप्पल पहनेका क्या फाइदा ।

हां जो भी कहो चप्पल भी हमारे ज़िंदेगी मे एक बडा भूमिका निभाता हे ।जेसे without सजनी घर फीका वेसे without footware पैर फीका ।