Ram and Bakri-राम और बकरी-Hindi kahani

 Ram and Bakri-राम और बकरी-Hindi kahani

Ram and Bakri

 Ram and Bakri-राम और बकरी

भरतपुर नाम का एक गाँव था वहाँ राम नाम का एक छोटा बच्चा रहता था । अभि तो राम बडा हो चुका है । ये कहानी है राम का बचपन की एक घटना हे । राम को करीब पाँच साल हुआ था बो अपना माता पिता के साथ आराम से रेह राहा था,बुल खेल के मज़ा मे था । राम का माता पिता ने सोचा एक बकरी खरीदने केलिए । अगले दिन  पिताजी चले गए बाजार को बकरी लेने केलिए राम को भी साथ मे ले गए । उनको एक छोटा बकरी पसंद आगया था बो बकरी को खरीदे अर घर को चले आए ।

राम बहत खुश था एक छोटा मेहमान उनके घर आया हे । एक अच्छा दोस्त भी उसको मिल गया हे । बेसे तो बकरी के साथ जितना भाब प्रेम करलो एक ना एक दिन तो उसको कसाई खाना जाना ही पड़ता है ।  पर राम को पता नहीं था बकरी के भबीष्य के बारे मे । बो हर दिन बकरी को खाना  खिलता अर खेलता था उसके साथ । कुछ दिन बाद इतना लगाब हो गया बकरी के साथ मानो उसका भाई है । ये देखके उसका माता पिता भी चिंतित थे क्यूँ की बो लोक बकरी को बढ़ाके बेचके कुछ पैसा कमाने केलिए लाए थे पर उनके बेटे के बकरी के प्रति बढ़ता लगाब सच मे एक चिंता का बिषय था ।

कुछ महीने बाद बकरी बडा हो गया । अभि तक राम को पता चल गया था बकरी बडा होने के बाद उसको मार के इंसान खा जाते है । एक दिन एक ब्यापरी राम के घर को आया था बकरी को खरीदने केलिए । बकरी अच्छी कीमत मे बिकेगा ये भी तय हो गया था । अर राम की माता पिता भी बकरी को जल्दी केसे बेच के पैसा कमाने के इच्छा मे थे ।

अगले दिन ब्यापरी आए बकरी को लेने केलिए तो देखा बकरी गायब है । उनलोगों का ध्यान नहीं राहा राम की तरफ राम भी गायब है । बकरी को लेके राम रातों रात चला गया काहां किसिको पता नहीं चला । राम को ढूंढने लगे सारे के सारे । राम बकरी को लेके बहत दूर चल गया था अर बकरी को एक पेड़ के नीची बांध के आराम करने लगा । तभी कुछ चोर बकरी को चुरा के ले गए राम रोक भी नहीं पाया क्यूँकी राम छोटा बच्चा था ।बकरी का भी राम की प्रति लगाब हो गया था बो भी चोरों से भागने की कोशिश किया । बो जेसे तेसे करके चोरोको अपना सिंग से मारा अर राम के पास चला आया ।

 उसके बाद राम भी समझ गया घरसे भागना सही नहीं था अपना घर मे ही सुरखित है बो भागने से पहले अपना माता पिता को समझाता तो बकरी को नहीं भेजने केलिए मान भी जाते । यही सोच के बकरी को लेके घर को चला गया । उसका माता पीता भी समझ गए अर बकरी को नहीं बेचा ।

ये कहानी से ये सिख मिलती है की कोई प्राणी को अगर बचपन से प्यार करो तो बो अपना दोस्त बन जाता है अर घर से बडा कोई भी स्वर्ग नहीं ।

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